आमलकी एकादशी व्रत सोमवार को करें, भगवान विष्णु करेंगे वास्तविक कल्याण

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ब्रह्मा पुराण में मान्धाता और वशिष्ठ संवाद में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की आमलकी एकादशी का महत्व वर्णित है। एक बार मान्धाता जी ने वशिष्ठ जी से प्रार्थना की हे ऋषिवर! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं, मुझ पर यदि आपकी कृपा है तो आप कृपा करके मुझे ऐसा व्रत बतलाइए जिसका पालन करने से मुझे वास्तविक कल्याण की प्राप्ति हो। इसके उत्तर में वशिष्ठ जी ने प्रसन्नचित होकर कहा, हे राजन्! मैं आपको शास्त्र के एक गोपनीय, रहस्यपूर्ण तथा बड़े ही कल्याणकारी व्रत की कथा सुनाता हूं, जो कि समस्त प्रकार के मंगल को देने वाली है। हे राजन्! इस व्रत का नाम आमलकी एकादशी व्रत है। यह व्रत बड़े से बड़े पापों का नाश करने वाला, एक हजार गाय दान के पुण्य का फल देने वाला एवं मोक्ष प्रदाता है।



आमलकी एकादशी व्रत के पहले दिन व्रती को दशमी की रात्रि में एकादशी व्रत के साथ भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए सोना चाहिए तथा आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान करके भगवान विष्णु की प्रतिमा के समक्ष हाथ में तिल, कुश, मुद्रा और जल लेकर संकल्प करें कि मैं भगवान विष्णु की प्रसन्नता एवं मोक्ष की कामना से आमलकी एकादशी का व्रत रखता हूं। मेरा यह व्रत सफलतापूर्वक पूरा हो इसके लिए श्रीहरि मुझे अपनी शरण में रखें।

26 फरवरी सोमवार को करें यह व्रत

तत्पश्चात मम कायिकवाचिकमानसिक सांसर्गिकपातकोपपातकदुरित क्षयपूर्वक श्रुतिस्मृतिपुराणोक्त फल प्राप्तयै श्री परमेश्वरप्रीति कामनायै आमलकी एकादशी व्रतमहं करिष्येश् इस मंत्र से संकल्प लेने के पश्चात षोड्षोपचार सहित भगवान की पूजा करें।

 

भगवान की पूजा के पश्चात पूजन सामग्री लेकर आंवले के वृक्ष की पूजा करें। सबसे पहले वृक्ष के चारों की भूमि को साफ करें और उसे गाय के गोबर से पवित्र करें। पेड़ की जड़ में एक वेदी बनाकर उस पर कलश स्थापित करें। इस कलश में देवताओं, तीर्थों एवं सागर को आमंत्रित करें। कलश में सुगंधी और पंच रत्न रखें। इसके ऊपर पंच पल्लव रखें फिर दीप जलाकर रखें। कलश पर श्रीखंड चंदन का लेप करें और वस्त्र पहनाएं। अंत में कलश के ऊपर श्री विष्णु की स्वर्ण मूर्ति स्थापित करें और विधिवत रूप से पूजा करें। रात्रि में भगवत कथा व भजन कीर्तन करते हुए प्रभु का स्मरण करें। द्वादशी के दिन सुबह ब्राह्मण को भोजन करवा कर दक्षिणा दें, पश्चात व्रत परायण करके अन्न जल ग्रहण करें।

एकादशी व्रत 2018 की तिथियां

-आमलकी एकादशी फाल्गुन शुक्ल पक्ष 26 फरवरी सोमवार
-पापमोचनी एकादशी चैत्र कृष्ण पक्ष 13 मार्च मंगलवार
-कामदा एकादशी चैत्र शुक्ल पक्ष 27 मार्च मंगलवार
-वरुथिनी एकादशी वैशख कृष्ण पक्ष 12 अप्रैल बृहस्पतिवार
-मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल पक्ष 26 अप्रैल बृहस्पतिवार

भगवान विष्णु ने कहा है जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं उनके लिए फाल्गुन शुक्ल पक्ष में एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है।

 

स्नान, उबटन जिसमे जौ और तिल पड़ा हो | जौ डाला हुआ पानी पीना, तिल डाला हुआ पानी लेना, तिल मिश्रित भोजन करना, तिल का दान करना, तिल का होम करना ये पापनाशक प्रयोग है |

? एकादशी के दिन करने योग्य ?

?? एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें …….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों,



तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l

? एकादशी के दिन ये सावधानी रहे ?

?? महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक एक चावल एक एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा

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