षटतिला एकादशी व्रत से बढ़ता है, सौभाग्य, होता हैं पापों का नाश

dev uthani gyaras 2017

रायपुर. प्रति वर्ष माघ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी का व्रत किया जाता है. पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन उपवास करके तिलों से ही स्नान, दान, तर्पण और पूजा की जाती है. इस दिन तिल का इस्तेमाल स्नान, प्रसाद, भोजन, दान, तर्पण आदि सभी चीजों में किया जाता है. तिल के कई प्रकार के उपयोग के कारण ही इस दिन को षटतिला एकादशी कहते हैं. आईए जानते हैं पंडित पी. एस. त्रिपाठी से इस व्रत का महत्व।

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हिन्दू धर्म के अनुसार तिल बहुत पवित्र माने जाते हैं और पूजा में इनका विशेष महत्व होता है. छ: प्रकार से तिलों के उपयोग के कारण ही इस एकादशी का नाम षट्तिला एकादशी पड़ा. तिल से स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन करना, तिल से तर्पण करना, तिल का भोजन करना, तिलों का दान करना.  हिन्दू पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी इस बार 11 जनवरी 2018 गुरुवार को शाम 07:11 से 12 जनवरी 2018 शुक्रवार को रात्रि 09:22 तक एकादशी है। विशेष तौर पर कहा गया है कि 12 जनवरी 2018 शुक्रवार को एकादशी का व्रत (उपवास) रखना चाहिए।



पौराणिक मान्यताओं के अनुसार षट्तिला एकादशी के दिन जो भी व्यक्ति व्रत करता है उसे तिलों से भरा घडा़ भी ब्राह्मण को दान करना चाहिए. ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा भाव से षटतिला एकादशी का व्रत रखने से सभी पापों का नाश होता है. माघ मास में पूरे माह व्यक्ति को अपनी समस्त इन्द्रियों पर काबू रखना चाहिए. काम, क्रोध, अहंकार तथा बुराई का त्याग कर भगवान की शरण में जाना चाहिए.



षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है. पद्म पुराण के अनुसार चन्दन, अरगजा, कपूर, नैवेद्य आदि से भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए. उसके बाद श्रीकृष्ण नाम का उच्चारण करते हुए कुम्हड़ा, नारियल अथवा बिजौर के फल से विधि विधान से पूज कर अर्घ्य देना चाहिए. रात्रि में गोबर के कंडों से हवन करें. एकादशी के रात्रि को 108 बार “ऊं नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र से उपलों को हवन में स्वाहा करना चाहिए. रात भर जागरण करके भगवान का भजन करें. अगले दिन भगवान का भजन-पूजन करने के पश्चात खिचडी़ का भोग लगाएं. ब्राह्मणों को भोजन कराएं एवं तिल का दान दें. इस दिन तिल पट्ठी का सागार लिया जाता है.




फल- षट्तिला एकादशी व्रत करने से मनुष्य का सौभाग्य बढ़ता है. कष्ट तथा दरिद्रता दूर होती है . विधिवत तरीके से व्रत रखने से स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है.

इन 6 कामों में करें तिल का उपयोग shat tila Ekadashi Fast sankashti chaturthi 2018

??षटतिला एकादशी व्रत में तिल का छ: रूपों में उपयोग करना उत्तम फलदाई माना जाता है। जो व्यक्ति जितने रूपों में तिल का उपयोग तथा दान करता है, उसे उतने हजार वर्ष तक स्वर्ग में स्थान प्राप्त होता है। षटतिला एकादशी पर 6 प्रकार से तिल के उपयोग तथा दान की बात कही है, वह इस प्रकार है-



? तिलस्नायी तिलोद्वार्ती तिलहोमी तिलोद्की।
तिलभुक् तिलदाता च षट्तिला: पापनाशना:।।
➡ अर्थात- इस दिन तिलों के जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल से हवन, तिल मिले जल को पीने, तिल का भोजन तथा तिल का दान करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, षटतिला एकादशी के दिन हमें पद्मपुराण के ही एक अंश का श्रवण और ध्यान करना चाहिए। इस दिन काले तिल व काली गाय दान करने का विशेष महत्व है।

?षट्तिला एकादशी पर यह ध्यान रखें ? importance of shat tila Ekadashi shattila ekadashi in hindi

?? स्नान, उबटन जिसमे जौ और तिल पड़ा हो | जौ डाला हुआ पानी पीना, तिल डाला हुआ पानी लेना, तिल मिश्रित भोजन करना, तिल का दान करना, तिल का होम करना ये पापनाशक प्रयोग है |



? एकादशी के दिन करने योग्य ?
?? एकादशी को दिया जला के विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें …….विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l



? एकादशी के दिन ये सावधानी रहे ?
?? महीने में १५-१५ दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक एक चावल एक एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा

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